इम्मानुएल: परमेश्वर हमारे साथ है।

“देखो, एक कुंंवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी, उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ है, ‘परमेश्वर हमारे साथ’”

क्रिसमस के अवसर पर मसीही घरों या कलीसियाओं में इम्मानुएल से सम्बन्धित अनेक गीत सुनने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पुराने नियम में भविष्यवाणी की गई थी कि आने वाले मसीहा का नाम ‘इम्मानुएल’ होगा। जबकि नये नियम में मसीहा को “इम्मानुएल” भी कहा गया। यह कैसे सम्भव है कि ‘इम्मानुएल’ नाम के बारे में की गई भविष्यवाणी यीशु के नाम में सच्चाई से पूरी होती है? आइए हम इसको क्रिसमस की घटना से समझने का प्रयास करें।

इम्मानुएल का ऐतिहासिक सन्दर्भ

“इम्मानुएल” इब्रानी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ ‘परमेश्वर हमारे साथ’ है। पुराने नियम में यह शब्द मुख्यतः दो बार (यशायाह 7:14, 8:8)  तथा नये नियम में एक बार (मत्ती 1:23) पाया जाता है। सम्भवतः यशायाह 8:10 में भी इसका अर्थ निहित है। यहूदा के राजा आहाज के समय में चिन्ह स्वरूप एक बालक उत्पन्न होने वाला था जिसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा। इस बच्चे का जन्म और नाम परमेश्वर की ओर से दिया गया एक चिन्ह था। यह चिन्ह राजा तथा उसके लोगों के लिए आश्वासन था कि शत्रु की सेना के आक्रमण के समय परमेश्वर उनकी सुरक्षा के लिए उनके साथ होगा (यशायाह 7:10-16)। नये नियम में हम देखते हैं कि आहाज राजा के समय में की गई प्रतिज्ञा यीशु के जन्म में विस्तृत व पूर्ण रूप से पूरी हुई। मत्ती का सुसमाचार बताता है कि “अब यह सब इसलिए हुआ कि प्रभु ने जो वचन नबी के द्वारा कहा था वह पूरा हो: देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा” जिसका अर्थ है ‘परमेश्वर हमारे साथ’। (मत्ती 1:22-23)।

इम्मानुएल नाम का अर्थ

इम्मानुएल का शाब्दिक अर्थ है ‘परमेश्वर हमारे साथ’। इम्मानुएल अर्थात परमेश्वर अपने लोगों के साथ में आरम्भ से ही था। उत्पत्ति के समय में परमेश्वर सबसे पहले अदन वाटिका में आदम-हव्वा के साथ था (उत्पत्ति 3:8-13)। वही परमेश्वर इब्राहीम, इसहाक, याकूब और यूसुफ के साथ था (उत्पत्ति 28:15, 39:2)। इस्राएलियों को मिस्र से निकालने के बाद वह आग और मेघ के खम्भे में होकर उनके साथ था (निर्गमन 13:21)। इसके बाद परमेश्वर अपनी प्रजा के मध्य तम्बू में होकर उनके साथ था (निर्गमन 25:8)। उसी परमेश्वर ने सुलैमान से कहा कि यदि मेरे लोग मेरी विधियों पर चलेंगे तो मैं उनके मध्य निवास करूँगा और अपनी प्रजा को न त्यागूंगा (1 राजा 6:13)। लेकिन इस्राएलियों ने परमेश्वर की विधियों का पालन नहीं किया इसलिए उनके मध्य से परमेश्वर की उपस्थित चली गई। फिर भी नबियों के द्वारा परमेश्वर का वचन उसके लोगों को दिया गया कि एक दिन वह अपने लोगों के साथ होगा। यूहन्ना का सुसमाचार बताता है कि वचन जो आदि से था वह देहधारी हुआ और हमारे मध्य में उसने निवास किया (यूहन्ना 1:14)। 

इम्मानुएल के रूप में यीशु मसीह

इम्मानुएल यीशु मसीह के अनेक शीर्षकों में एक है जो उसकी भूमिका के विस्तृत अर्थ को समझाता है। इम्मानुएल अर्थात परमेश्वर हमारे साथ है। यह पुराने नियम में परमेश्वर का उसके लोगों के साथ रहने को व्यक्त करता है, क्योंकि परमेश्वर अपने लोगों के साथ में रहता था। परमेश्वर मसीह में देहधारण के द्वारा हमारे साथ रहा।  

इसी इम्मानुएल की अभिव्यक्ति हम सुसमाचारोंं के साथ ही सम्पूर्ण नये नियम में भी पाते हैं। गलातियों 4:4 में पौलुस कहता है कि जब समय पूरा हुआ तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा जो स्त्री से उत्पन्न हुआ। यीशु परमेश्वर के स्वरूप में होते हुए भी मनुष्य की समानता में हो गया (फिलिप्पियों 2:6-7)। वह सृष्टिकर्ता परमेश्वर होने के बाद भी माँस और लहू में सहभागी हो गया (इब्रानियों 1-2)। यह दिखाता है कि परमेश्वर पुराने नियम से बढ़कर अब लोगों के साथ सदेह रहने आ गया। अब लोग परमेश्वर को यीशु मसीह के रूप में देख सकते थे, छू सकते थे और उससे बात कर सकते थे (यूहन्ना 14:8-9)। इसीलिए यीशु को इम्मानुएल कहा जाता है, क्योंकि परमेश्वर मनुष्यों के साथ मानव शरीर में रहा।

इम्मानुएल आज हमारे साथ है

सामान्य रूप से परमेश्वर अपने सर्वउपस्थित गुण में होकर प्रत्येक स्थान पर उपस्थित है और कोई भी व्यक्ति उसकी उपस्थिति से दूर नहीं है (भजन 139:7-10)। बाइबल परमेश्वर की सामान्य उपस्थिति के अलावा एक विशेष उपस्थिति के बारे में वर्णन करती है। यह विशेष उपस्थिति परमेश्वर के उन विशेष लोगों के साथ होती है जो यीशु पर विश्वास करने के द्वारा परमेश्वर की सन्तान बन गए हैं (यूहन्ना 1:12)। यीशु मसीह ने स्वर्ग जाने से पहले यह प्रतिज्ञा की थी इस युग के अन्त तक वह सदैव अपने लोगों के साथ रहेंगे (मत्ती 28:20)। इतना ही नहीं यीशु ने हमारे साथ रहने के लिए पवित्र आत्मा को भेजा जो हमारा सहायक है (यूहन्ना 14:16)। पवित्र आत्मा विश्वासियों के भीतर वास करता है, क्योंकि हम परमेश्वर का मन्दिर हैं (1कुरिन्थियों 3:16)। 

परमेश्वर का हमारे साथ रहना केवल इसी जीवन तक सीमित नहीं है परन्तु एक दिन नई सृष्टि में परमेश्वर मसीह में होकर अनन्तकाल के लिए अपने लोगों के साथ रहेगा।

अद्भुत बात यह है कि हमारा परमेश्वर हमारे साथ में रहने वाला परमेश्वर है। जैसे परमेश्वर आरम्भ में आदम और हव्वा के साथ अदन की वाटिका में था वैसे ही परमेश्वर पुनः अपने लोगों के साथ होगा। परमेश्वर का हमारे साथ रहना केवल इसी जीवन तक सीमित नहीं है परन्तु एक दिन नई सृष्टि में परमेश्वर मसीह में होकर अनन्तकाल के लिए अपने लोगों के साथ रहेगा। इस बात आश्वासन प्रकाशितवाक्य 21:3 देता है कि “देखो, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है, वह उनके मध्य निवास करेगा। वे उसके लोग होंगे तथा परमेश्वर स्वयं उनके मध्य रहेगा।” यह विचार “इम्मानुएल: परमेश्वर हमारे साथ है”  के अर्थ को पूर्ण करता है। 

मेरे प्रियो, क्रिसमस हमें दिखाता है कि परमेश्वर मनुष्य बनकर यीशु के रूप में आया ताकि परमेश्वर हमारे साथ रहे।

मेरे प्रियो, क्रिसमस हमें दिखाता है कि परमेश्वर मनुष्य बनकर यीशु के रूप में आया ताकि परमेश्वर हमारे साथ रहे। यदि आप चाहते हैं कि परमेश्वर की विशेष उपस्थिति आपके साथ रहे तो यीशु मसीह पर विश्वास कीजिए। यशायाह 49:15 में परमेश्वर कहता है, ‘भले ही माता अपने दुधमुंहे बच्चे को भूल जाए परन्तु मैं तुझे नहीं भूलूंगा।’ यदि अभी तक आप परमेश्वर से दूर हैं तो उसके पास आइए अन्यथा आप सदा के लिए उससे दूर किए जाएंगे।

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