शुभ शुक्रवार को शुभ क्यों कहा जाता है?

यीशु मसीह के क्रूसीकरण के दिन को शुभ-शुक्रवार क्यों कहा जाता है?

हमारे देश में सामान्य रूप से मृत्यु के दिन को अशुभ और शोक का दिन माना जाता है। परन्तु जब हम यीशु मसीह की क्रूस पर मृत्यु की बात करते हैं, तो यह दिन शुभ कहलाता है। इसे शुभ शुक्रवार इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इस दिन यीशु मसीह जो सदेह पूर्ण परमेश्वर और पूर्ण मनुष्य है, वह हम पापियों के पापों की क्षमा व उद्धार के लिए क्रूस पर चढ़ गया। उसने हमारे लिए अपने आप को बलिदान कर दिया।

यीशु के क्रूसीकरण का दिन अर्थात् शुभ शुक्रवार का दिन संसार के इतिहास का सबसे दुखद दिन था। इस दिन संसार का सृष्टिकर्ता परमेश्वर मनुष्य देहधारण करके क्रूस पर मर गया। यह दुख और शोक का दिन होने के पश्चात् भी तीन मुख्य कारणों से शुभ अर्थात् अच्छा दिन कहलाता है – 

यीशु मसीह जो सदेह पूर्ण परमेश्वर और पूर्ण मनुष्य है, वह हम पापियों के उद्धार के लिए क्रूस पर अपने आप को बलिदान कर दिया।

क्योंकि इस दिन परमेश्वर का न्यायपूर्ण प्रचण्ड प्रकोप और करुणा दोनों क्रूस पर एक साथ प्रदर्शित हुई –

शुभ शुक्रवार सम्पूर्ण मानव इतिहास में एक साथ शोकपूर्ण व दुखद और आनन्दायक व जीवनदायक दिन था। इस दिन परमेश्वर पिता हमारे पापों के प्रति अपने पवित्र व न्यायपूर्ण प्रकोप को अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह पर उण्डेला। क्योंकि हम पापियों के प्रति धर्मी परमेश्वर का प्रकोप भड़का हुआ था। उस प्रकोप व न्याय का सामना सम्पूर्ण मानवता को करना था, परन्तु यीशु ने हमारे लिए उस क्रूस पर परमेश्वर पिता के प्रचण्ड प्रकोप को सहकर उसका कोपशान्त कर दिया। अब वह स्वयं हमारे पापों का प्रायश्चित्त है (1 यूहन्ना 2:2)।

न केवल इस दिन परमेश्वर ने अपने प्रकोप को प्रभु यीशु पर उण्डेला, परन्तु इसके साथ ही साथ उसने अपने प्रेम व करुणा को भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। मैंने और आपने पहले होकर उससे प्रेम नहीं किया था, फिर भी उसने पहले होकर हमसे प्रेम किया और अपने पुत्र को हमारे पापों के प्रायश्चित हेतु दे दिया (1यूहन्ना 4:10)। यह बहुत अद्भुत और आश्चर्यजनक है कि परमेश्वर पिता ने हमारे पापों के बदले में अपने एक मात्र या एकलौते पुत्र को दे दिया, ताकि वह क्रूस पर बलिदान होने के द्वारा हम सब के पापों का प्रायश्चित्त करे। साथ ही साथ सम्पूर्ण मानवता के लिए यीशु का क्रूसीकरण परमेश्वर की अपार करुणा का सदृश प्रकटीकरण है। इसलिए, यीशु के क्रूसीकरण व मृत्यु का दिन हमारे लिए शुभ है।

क्योंकि इस दिन हमारे पापों की क्षमा हेतु यीशु ने दुखों को सहा और स्वयं को बलिदान कर दिया :

प्रभु यीशु मसीह ने दुख उठाने और क्रूस पर स्वयं को बलिदान करने के द्वारा हमारे स्थान पर दण्डात्मक प्रतिस्थापनीय प्रायश्चित्त बन गया। उसने हमारे बदले में पापों के दण्ड व समस्त दुखों को सहा और पापों के लिए एक दुख उठाने वाला सेवक बना। जैसा कि यशायाह भविष्यवक्ता ने यीशु मसीह के बारे में लगभग 700 वर्ष पूर्व भविष्यवाणी की थी। “निश्चय उसने हमारी पीड़ाओं को आप सह लिया और हमारे दुखों को उठा लिया…परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण बेधा गया, वह हमारे ही अधर्म के कामों के लिए कुचला गया; हमारी शान्ति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी, उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए।…यहोवा ने हम सब के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया…” (यशायाह 53:3-13)। ताकि मैं और आप पापों की क्षमा को प्राप्त करें।

न केवल यीशु मसीह ने क्रूस पर दुखों को हमारे लिए सहा, परन्तु इसके साथ ही साथ यीशु मसीह ने हमारे पापों व अधर्मों के लिए सिद्ध बलिदान रूप में अपने आप को उस कलवरी क्रूस पर एक बार सदा के लिए बलिदान कर दिया। “क्योंकि यह असम्भव है कि बैलों और बकरों का लहू पापों को दूर करे” (इब्रानियों 10:4)। इसलिए उसने हमारे बदले में स्वयं को बलिदान करने के द्वारा हमारे पापों का प्रायश्चित्त कर दिया। उसने हमारे ऊपर से पाप के दण्ड व दोष तथा शाप को अपने ऊपर ले लिया। ताकि हमारे पापों को दूर करके वह हमें सम्पूर्णता से पवित्र व निर्दोष ठहराए। इसलिए जो मसीह में विश्वास करते हैं वे दण्ड के भागीदार नहीं हैं, परमेश्वर का वचन हमें बताता है कि “…अब उन पर जो मसीह यीशु में हैं, दण्ड की आज्ञा नहीं” (रोमियों 8:1)। इस कारण से हम मसीहियों के लिए यीशु का क्रूसीकरण अर्थात् शुभ शुक्रवार अच्छा या शुभ है। 

क्योंकि इस दिन यीशु के क्रूसीकरण के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर से हुआ।

यीशु का क्रूसीकरण हम मसीहियों के लिए अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्रूस वह स्थान है जहां पर स्वर्ग और पृथ्वी का मिलन हुआ अर्थात् परमेश्वर और मनुष्य दोनों का मिलन हुआ। इसी क्रूस के द्वारा ही हम विद्रोहियों और अधर्मियों को परमेश्वर के समीप लाया गया। हम अपने आप परमेश्वर के निकट नहीं आ सकते थे परन्तु यीशु मसीह ने अपने आप को क्रूस पर बलिदान करने के द्वारा हमें परमेश्वर पिता के निकट लाया। इसलिए प्रेरित पौलुस विश्वासियों को स्मरण दिलाता है कि हम आशाहीन तथा संसार में परमेश्वर रहित थे। पहिले हम यीशु मसीह से दूर थे अब मसीह के लहू के द्वारा उसमें समीप लाए गए हैं (इफिसियों 2:12-13)। 

यीशु का क्रूसीकरण हम मसीहियों के लिए अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्रूस वह स्थान है जहां पर स्वर्ग और पृथ्वी का मिलन हुआ अर्थात् परमेश्वर और मनुष्य दोनों का मिलन हुआ।

मसीह यीशु में, न केवल हम परमेश्वर के निकट लाए गए, परन्तु इसके साथ ही साथ उसके क्रूसीकरण के द्वारा परमेश्वर से हमारा मेल-मिलाप हो गया है। उसके बहाए गए लहू के द्वारा परमेश्वर और मनुष्य के मध्य शान्ति स्थापित हुई और मेल-मिलाप हुआ (कुलुस्सियों 19-20)। शुभ शुक्रवार का दिन हमें हमारी अतीत और वर्तमान की आत्मिक स्थित को स्मरण दिलाता है कि “एक समय था जब हम और आप अलग किए हुए और मन से बैरी थे, और बुरे कामों में लगे हुए थे, फिर भी  उसने (यीशु ने) अपनी शारीरिक देह में क्रूस पर मृत्यु के द्वारा हम से मेल करा दिया है…” (कुलुस्सियों 1:21-22)। 

अतः इन्हीं सब कारणों से सम्पूर्ण विश्व में, शुक्रवार के दिन यीशु मसीह के क्रूसीकरण व मृत्यु को शुभ शुक्रवार के रूप में मनाया जाता है। उसने अपने जीवन, क्रूस पर मृत्यु और पुनः जी उठने के द्वारा उद्धार का मार्ग खोल दिया। इसलिए यह यीशु के क्रूसीकरण का दिन शुभ कहलाता है, क्योंकि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए मुक्ति का मार्ग खुल गया है।

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