हमें अपने शत्रुओं के लिए क्यों प्रार्थना करनी चाहिए?

बाइबल में कई पद हमें इस बात के लिए आज्ञा देते हैं कि हमें अपने शत्रुओं के लिए प्रार्थना करनी चाहिए (लूका 6:27,35, रोमियों 12:20)। इसके लिए सबसे चिर-परिचित खण्ड मत्ती 5:43-44 है। ये खण्ड हमें सिखाता है कि हम विश्वासियों का जीवन शत्रुओं से प्रेम और उनके लिए प्रार्थना करने से चिन्हित होना चाहिए। इस खण्ड में यीशु मसीह अपने शत्रुओं से प्रेम करने और उनके लिए प्रार्थना करने की आज्ञा देता है। 

शत्रु केवल वे ही नहीं हैं जो हमें केवल चोट पहुंचाते हैं।  कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हमारे विश्वास का उपहास करते हैं। ऐसे लोग हमारे घर में, हमारे स्कूल में, कॉलेज में, कार्यालय में हो सकते हैं। यीशु मसीह के अनुसार हमें इन लोगों से प्रेम करना है और इनके लिए प्रार्थना करना है। उनकी घृणा के बाद भी, परमेश्वर चाहता है कि हम उनकी भलाई की चाहना करें तथा उनके लिए प्रार्थना करें। इसलिए, हम इस लेख के द्वारा मुख्यत: तीन बातों को देखेगें कि हमें अपने शत्रुओं के लिए क्यों प्रार्थना करना चाहिए: 

क्योंकि परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया है।

हम अधिकतर इस बात से संघर्ष करते हैं कि कैसे हम उस व्यक्ति से प्रेम करें जो हमारे विरुद्ध सदैव गलत करता है या सदैव पाप करता रहता है। कभी-कभी हम उनसे घृणा करने लगते हैं और हम स्वत: ऐसे लोगों से प्रेम नहीं कर पाते हैं तथा हमारा हृदय उनके प्रति कड़वाहट से भर जाता है। 

परन्तु हम इसलिए प्रेम कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमसे पहले होकर प्रेम किया है (1 यूहन्ना 4:10)। इसलिए प्रेम करने का हमारा उदाहरण कोई और नहीं, परन्तु स्वयं परमेश्वर है। पौलुस रोमियों 5:6-10 में कहता है कि “जब हम निर्बल ही थे…जब हम शत्रु ही थे उस समय परमेश्वर पिता ने हमसे प्रेम किया। 

परमेश्वर का प्रेम ही हमें प्रेरित करता है कि हम अपने शत्रुओं से प्रेम करें। और यह प्रेम उनके लिए प्रार्थना करने में दिखाई देगा। सबसे पहले, हम अपने लिए प्रार्थना करेंगे कि प्रभु हमारे हृदय में उनके लिए प्रेम दे ताकि हम उनके लिए प्रार्थना कर सकें। हम यह प्रार्थना करेंगे कि वे परमेश्वर पिता के प्रेम को जान सकें, वे जान सकें कि परमेश्वर प्रेमी और दयालु है। मसीह यीशु भी क्रूस पर परमेश्वर से अपने शत्रुओं के लिए प्रार्थना करता है। प्रेरितों के काम में, स्तिफनुस जो कि यीशु मसीह का शिष्य था, हमारे लिए एक आदर्श उदाहरण है जो अपने सताने वालों के लिए प्रार्थना करता है। जब लोग उस पर पथराव कर रहे थे उस समय वह प्रार्थना करते हुए कहता है, “…प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा!” (प्रेरितों के काम 9:4)। स्तिफनुस ने अपने सताने वालों के बचाए जाने के लिए प्रार्थना किया। 

क्योंकि परमेश्वर ने हमारे पापों को क्षमा किया है। 

क्षमा करना प्रेम का प्रकटीकरण है, इसलिए न केवल हम अपने शत्रुओं से प्रेम करेंगे, परन्तु उन्हें क्षमा भी करेंगे। परमेश्वर पिता ने प्रभु यीशु मसीह में होकर हमारे सारे पापों को क्षमा कर दिया है। स्वयं प्रभु यीशु मसीह क्षमा करने का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। क्रूस पर अपनी पीड़ा के मध्य में, वह अपने सताने वालों के लिए कहता है, “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34)। उसने उनके विनाश के लिए प्रार्थना नहीं किया, उसने बदला लेने के लिए प्रार्थना नहीं किया; परन्तु उसने प्रार्थना की कि वे क्षमा कर दिए जाएं।

जब लोग हमारे विश्वास के कारण हमारे विरुद्ध कोई गलत कार्य करते हैं, हमें सताते हैं, हमसे घृणा करते हैं तो हमें अपने प्रभु यीशु मसीह के समान लोगों के पापों को क्षमा करना है। इसलिए हम जो कि यीशु मसीह के शिष्य हैं, यह प्रार्थना नहीं करेंगे कि हमारे शत्रु नाश हो जाएं, परन्तु यह कि वे बचाए जाएं। परमेश्वर अपनी दया में होकर उनके पापों को क्षमा करे और उनको अनन्त दण्ड से बचा ले। पौलुस कुलुस्सियों 3:13 में कहता है कि, “… एक-दूसरे के अपराध क्षमा करो, जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे तुम भी करो।”

क्योंकि परमेश्वर ने हमारा उद्धार किया है। 

प्रभु यीशु मसीह इस पृथ्वी पर मनुष्यों का उनके पापों से उद्धार करने आया था। यह केवल परमेश्वर के लिए सम्भव है कि वह हमारे पापों को क्षमा करे। जैसे उसने पापों से हमारा उद्धार किया है वैसे ही हम दूसरों के उद्धार के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और विशेष-रीति से अपने शत्रुओं के लिए। हम अपने शत्रुओं लिए प्रार्थना करें कि प्रभु उनके हृदय को खोले ताकि वे अपनी दुष्टता के कार्यों से मन फिराते हुए प्रभु के पीछे आएं। परमेश्वर किसी भी जन का हृदय बदल सकता है, वह किसी पर भी दया सकता है (रोमियों 9:15)। इसलिए हमें उन लोगों पर दया दिखाते हुए उनके उद्धार के लिए प्रार्थना करना चाहिए। 

हमें स्मरण रखना है कि एक समय था जब हम परमेश्वर के शत्रु थे (रोमियों 5:10) परन्तु अब हम उसकी सन्तान हैं (यूहन्ना 1:12)। एक समय हम परमेश्वर के बैरी थे परन्तु अब हम परमेश्वर के निकट हैं इसलिए हम उनके लिए प्रार्थना कर सकते हैं जो अभी परमेश्वर से दूर हैं, जो अभी परमेश्वर के बैरी हैं ताकि वे भी परमेश्वर के निकट आ सकें, ताकि वे भी परमेश्वर के सन्तान बन सकें। हम ऐसा इसलिए करेंगे क्योंकि मसीह यीशु में परमेश्वर पिता ने हमसे प्रेम किया है, हमारे पापों को क्षमा किया है और हमारा उद्धार किया है।  

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